सीएम सिटी के छात्र ने अपने कमरे में रंगोली बना दिया संदेश, 'कोई रोड पर ना निकले'
कोरोना से बचाव के लिए देश भर में लगे लॉकडाउन के बीच गोरखपुर के एक छात्र ने अपने कमरे में सुंदर रंगोली बनाई। इस रंगोली में 'कोरोना: कोई रोड पर न निकले' को कलात्मक ढंग से लिखकर उन्होंने इस वैश्विक महामारी से निपटने में सबसे बड़ी जिम्मेदारी के पालन का संदेश दिया है।
24 मार्च को राष्ट्र के नाम पर संदेश में कोरोना का मतलब 'कोई रोड पर ना निकले' समझाते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के लोगों से कोरोना वायरस की गंभीरता को समझने और घरों में रहने की अपील की थी। उन्होंने 21 दिनों के राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की थी।
मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले सुरेन्द्र प्रजापति ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील के अक्षरश: पालन का संदेश देने के लिए उन्होंने यह रंगोली बनाई। सुरेन्द्र ने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से 2016 में एम इन फाइन आर्टस किया है। इस समय वह यहीं से बीएड कर रहे हैं। सुरेन्द्र गोरखपुर के पैडलेगंज के पास किराए पर एक कमरे में अकेले रहते हैं। सामान्य दिनों में वह बच्चों को रंगोली सिखाते थे लेकिन लॉकडाउन की वजह से सब बंद है। सुरेन्द्र ने बताया कि लॉकडाउन के पहले दिन से ही वह अपने कमरे में है।
शुरुआती कुछ दिनों तक उन्होंने कमरे में पहले से मौजूद राशन से काम चलाया। लेकिन अब यह खत्म होने वाला है। नया सामान मंगाने के लिए सुरेन्द्र होम डिलेवरी का फोन पर आर्डर करेंगे। पूरे दिन में वह सिर्फ शाम को गली में आने वाले ठेले से सब्जी खरीदने के लिए बाहर निकलते हैं। वो भी सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन करते हुए। छात्र सुरेन्द्र प्रजापति ने कहा कि इस वक्त सबसे ज्यादा जरूरी है कि जो जहां है वहीं रुक जाए इसलिए लॉकडाउन के बाद वह घर नहीं गए।
कमरे पर ही रहे और चाहते हैं कि सभी इसी तरह अपने-अपने घरों में रहें ताकि देश कोरोना जैसी वैश्विक महामारी को मात दे सके। उन्होंने कहा कि पिछले दो दिन से जिस तरह दिल्ली-नोएडा और दूसरे शहरों से उत्तर प्रदेश और बिहार के मजदूरों का पलायन हुआ है वो बहुत ही दु:खद और भयावह है। सरकारों को इन मजदूरों के लिए उन्हीं के स्थानों पर पूरी व्यवस्था करनी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका।