मोहन भागवत बोले- 2025 तक हर गांव में लगे संघ की शाखा

मोहन भागवत बोले- 2025 तक हर गांव में लगे संघ की शाखा


राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के सर संघचालक मोहन भागवत ने प्रांत, जिला  प्रचारकों और कार्यकर्ताओं को ग्रामीण इलाकों में हर न्याय पंचायत और शहरी इलाके में हर बस्ती तक संघ की शाखा विस्तार के निर्देश दिए। बैठक में संघ के शताब्दी वर्ष 2025 तक देश के हर गांव तक शाखा को पहुंचाने के लक्ष्य पर भी चर्चा हुई।


आरएसएस पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र की नेताजी सुभाष चंद्र बोस नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में चार दिवसीय बैठक के अंतिम दिन सोमवार को संघ प्रमुख ने तीन सत्रों में बात की। 


पहले दो सत्रों में विभाग और जिला प्रचारक, अंतिम सत्र में प्रांत प्रचारकों और कार्यकर्ताओं से बात हुई। गोरक्ष प्रांत के प्रांत कार्यवाह डॉ. संजीत कुमार ने बताया कि बैठकों में मुख्यत: कार्य विस्तार के बारे में बात हुई। निकट भविष्य में पूरे देश में ग्रामीण क्षेत्रों के न्याय पंचायत स्तर पर और नगरीय क्षेत्र के बस्ती स्तर पर शाखा कार्य विस्तार योजना पर चर्चा हुई।


संघ प्रमुख ने कहा कि कार्यकर्ता किसी भी संगठन को विस्तार देने में मुख्य भूमिका निभाता है। अपने  लक्ष्य पर दृष्टि रखते हुए त्याग और समर्पण की बदौलत सम्पूर्ण समाज के लिए प्रेरक बनकर काम करता है। वैचारिक अधिष्ठान की दृढ़ता के कारण किसी भी काम के विस्तार के लिए चिन्तन, चर्चा, निर्णय, योजना और परिश्रम पूर्वक काम को पूरा करना ही संघ की सफलता का मूल मंत्र है। उन्होंने कहा कि सामूहिक शक्ति से संगठन को बल मिलता है। 


छोटे-छोटे कार्यक्रमों से संस्कार देता है संघ 


संघ प्रमुख ने कहा कि व्यक्ति के निर्माण की दिशा में छोटे-छोटे कार्यक्रमों के जरिए संघ संस्कार देता है। इस कार्य के विस्तार के लिए वह जीवन को कृतित्व, व्यक्तित्व, समझदारी और भक्ति  से स्वयं का विकास करता है। कार्यकर्ता जो काम करता है वो नि:स्वार्थ बुद्धि, धैर्य, परिश्रम, साहस, त्याग, तपस्या और लक्ष्य के प्रति पूरी निष्ठा से करता है। जो समाज और देश निर्माण की दिशा में निरंतर बढ़ता रहता है वही श्रेष्ठ कार्यकर्ता बनता है। 


कार्यकर्ता में नहीं होना चाहिए अहंकार


संघ प्रमुख ने कहा कि जो कार्यकर्ता अहंकार से मुक्त होकर काम करता है वही सात्विक कार्यकर्ता के रूप में संगठन के काम का विस्तार करता है। संघ और कार्यकर्ता की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि संघ यानी शाखा, शाखा यानी कार्यक्रम, कार्यक्रम यानी संस्कार, संस्कार यानी कार्यकर्ता, कार्यकर्ता यानी कार्य का विस्तार करने वाला। उन्होंने कहा कि इसी पद्धति से संघ पिछले 95 वर्षों से संगठन के कार्य का विस्तार कर रहा है। स्वयंसेवकों का उद्देश्य भी यही है। संगठन की इसी कार्य पद्धति के जरिए राष्ट्र को परम वैभव पर ले जाना और सम्पूर्ण विश्व में भारत माता की जय-जयकार के सपने को साकार करने के लिए संघ निरन्तर काम कर रहा है। व्यक्ति निर्माण से ही राष्ट्र का निर्माण होगा।